Budget 2026 For Farmers: एक फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026 देश के करोड़ों किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खेती की बढ़ती लागत, मौसम की मार और फसलों के गिरते दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के किसान संगठनों ने सरकार के सामने साफ कहा है कि अब आधे-अधूरे उपाय नहीं, बल्कि बड़े फैसलों की जरूरत है। इस बार की सबसे बड़ी उम्मीद MSP के दायरे को बढ़ाने और PM Kisan योजना की राशि में बढ़ोतरी से जुड़ी हुई है।
खेती घाटे का सौदा बनती जा रही
जमीन पर हालात काफी गंभीर हैं। आलू, प्याज और टमाटर जैसी रोजमर्रा की फसलें कई बार लागत से भी कम कीमत पर बिक रही हैं। उदाहरण के तौर पर, आलू की उत्पादन लागत करीब 6 रुपये प्रति किलो बताई जाती है, लेकिन मंडियों में यही 3–4 रुपये में निकल जाता है। ऐसे में किसान कर्ज में डूबते जा रहे हैं और नई पीढ़ी खेती छोड़कर शहरों की ओर रुख कर रही है। Budget 2026 से किसानों को उम्मीद है कि सरकार ऐसी नीति लाए जो खेती को फिर से लाभकारी बना सके।
MSP का विस्तार बना सबसे बड़ा मुद्दा
फिलहाल MSP कुछ सीमित फसलों तक सिमटा हुआ है, जबकि सब्जी उत्पादक किसान पूरी तरह बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर हैं। किसान संगठनों की मांग है कि आलू, प्याज, टमाटर और अन्य सब्जियों को भी MSP सुरक्षा मिले। पिछले साल टमाटर कभी 100 रुपये किलो पहुंचा तो कुछ हफ्तों बाद 5 रुपये में बिकने लगा — ऐसी अस्थिरता किसानों को बर्बादी की ओर धकेल देती है। स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार लागत +50% MSP लागू करने की मांग भी फिर से जोर पकड़ रही है।
PM Kisan सम्मान निधि बढ़ाने की चर्चा तेज
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अभी किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई के दौर में इसे बेहद कम माना जा रहा है। कई किसान संगठन इसे बढ़ाकर 12,000 रुपये या 24,000 रुपये सालाना करने की मांग कर रहे हैं। खाद, बीज, कीटनाशक और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में सीधी आर्थिक मदद छोटे और सीमांत किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
कृषि अनुसंधान और नई तकनीक पर जोर की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि खेती को टिकाऊ बनाने के लिए रिसर्च और नई तकनीक में निवेश बढ़ाना जरूरी है। भारत फिलहाल अपनी GDP का बहुत छोटा हिस्सा कृषि अनुसंधान पर खर्च करता है। जलवायु परिवर्तन के दौर में कम पानी में उगने वाली और रोग प्रतिरोधी किस्मों की जरूरत बढ़ गई है। अगर बजट में कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों को मजबूत फंड मिलता है, तो खेती की तस्वीर बदल सकती है।
सोलर ऊर्जा से घट सकती है खेती की लागत
बिजली और डीजल का खर्च खेती में बड़ा बोझ है। किसान चाहते हैं कि PM Kusum योजना के तहत सोलर पंप पर सब्सिडी और बढ़े। अगर सिंचाई सोलर ऊर्जा से होने लगे, तो लागत घटेगी और किसान अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर सकते हैं। इससे पर्यावरण और किसानों दोनों को फायदा होगा।
Budget 2026 For Farmers फसल बीमा और आपदा राहत में सुधार की मांग
हर साल बाढ़, सूखा और ओलावृष्टि से भारी नुकसान होता है, लेकिन बीमा क्लेम समय पर नहीं मिल पाता। किसान चाहते हैं कि तकनीक के जरिए नुकसान का आकलन तेजी से हो और भुगतान प्रक्रिया सरल बने। किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर कम करने की मांग भी इस बार बजट चर्चा में शामिल है।
भंडारण और बाजार व्यवस्था सुधारने पर जोर
फसल कटते ही अधिक सप्लाई के कारण दाम गिर जाते हैं। पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस न होने से किसान मजबूरी में सस्ता बेच देते हैं। अगर हर जिले में आधुनिक भंडारण सुविधा विकसित होती है, तो किसान सही समय पर बेहतर दाम पा सकते हैं। साथ ही, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत करने से बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है।
क्या यह बजट किसानों के लिए गेम चेंजर बनेगा?
Budget 2026 किसानों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। MSP विस्तार, PM Kisan बढ़ोतरी, सोलर ऊर्जा, रिसर्च निवेश, बीमा सुधार और भंडारण ढांचे पर ठोस फैसले लिए गए, तो कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है। अब सबकी नजर 1 फरवरी पर है — क्या सरकार किसानों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी, यही बड़ा सवाल है।
पीएम किसान योजना ऑफिशियल वेबसाइट
फसल के अनुसार MSP रेट यहां से चेक करें।







